जहाँ-जहाँ भोजपुरिया लोग बा उन्हां भोजपुरी विकास के नाम पर कुछ संस्था जरूर बा। ई संस्था भोजपुरी खातिर का करत बा कहल मुश्किल बा। दरअसल हर संस्था , संस्था के रूप में कुछ लोगन के एगो गोल ह जवना का दोसर संस्था अथवा लोग से ना पटे। आपन डफली आपन राग ! वैचारिक मतभेद हो सकेला बाकिर भोजपुरी के विकास,बाधा,प्रयास आदि के लेके एगो राष्ट्रीय मंच पर साथे जरूर आवे के चाहीं बाकिर ई बात फिलहाल मेंढक के तराजू पर तौले वाली बात बा ! ...काहे कि सभे अपना मने बेस्ट क रहल बा। 
2008 से हम भोजपुरी के लगभग आधा दर्जन से बेसी भोजपुरी संस्था के सदस्य हईं बाकिर, वार्षिक , अर्ध-वार्षिक आयोजन , भाषण, पुस्तक-विमोचन , भविष्य के योजना के अलावा जमीनी स्तर पर काम नईखे लउकत। 
अगर भोजपुरी शरीर ह त सबसे जरुरी बा ई जानल जे एह शरीर के कवन अंग कमजोर भा रोगग्रस्त बा ताकि ओकर निवारण हो सके। जबकि ई होत नईखे। कुछ बात पर गंभीरता से लागे के होई जईसे-
1.हर संस्था के अध्यक्ष,सचिव , बड़ अधिकारी लोग एगो मंच पर साल में कम-से-कम दू बेर साथे आओ। 
2.भोजपुरी के निमन साहित्य के प्रकाशन सबका साझा सहयोग से अईसन पब्लिकेशन से होखो जवन ऑनलाइन - ऑफ़लाइन निमन मार्केटिंग करत होखे। 
3.एक दूसरा के पीठ थपथपावे खातिर बनल पुरस्कार-सम्मान से बचे के कोशिश होखो।
4.भोजपुरी के सर्वाधिक नुकसान अश्लील संगीत से बा, रिकॉर्डिंग/गवनई/रिलीजिंग के इतना आसान व्यवस्था बा कि एह पर रोक मुश्किल बा , जरुरी बा कि हर संस्था साल में कम से कम 2गो भोजपुरी के निमन एलबम के प्रमोट करो।
5. एलबम असही मत बन जाओ, जानल जाओ कि कवन विधा में हमनी ज़ीरो बानी आ फेर ओह विधा के ऑडियो/ वीडियो के ही प्रमुखता दियाव... ना त मुँह चमकत रही आ हाथ गोर सड़त रही।
6. हर संस्था एक मंच पर आके अलग-अलग विधा के 'गोद' भी ले सकेला। एह से प्रतिभा का पहचान मिली आ लोग भोजपुरी में विभिन्न विधा के अपनावे से ना हिचकी।
7. जब केहू का बाहर में सम्मान मिलेला त फेर गाँव-घर के लोग भी सम्मान देवेला, एह से आयोजन के प्लेटफॉर्म शहर जरूर होखे के चाहीं।
8. गाँव में जवन आयोजन होत बा ओह खातिर ई जरुरी बा कि आयोजन अलग-अलग गाँव में होखे, ना त आयोजन लोग खातिर एगो उत्सव आ आयोजक खातिर एगो रूटीन बन जाई आ धीरे-धीरे आयोजक के टीम बिखरी।
9. भोजपुरी के गायक-गायिका , लेखक लोग भी एगो वैचारिक मंच पर आवो जहाँ वरीष्ठ भोजपुरी आ शाश्त्रीय गायक , लेखक लोग के मार्गदर्शन प्राप्त कईल जाओ।
10. भोजपुरी संगीत अभी तक सुन के आ कॉपी क के गावे के विधा बा नतीजा कलाकार के गायकी टाइप्ड बा , जरुरी बा एकरा के सीखे वाला विधा बनावल।
उपरोक्त के अलावा भी बहुत काम बा बाकिर जरुरत बा कि जवन लउकत बा पहले ओकरा के कार्यान्वित कईल जाओ फेर अगिला पड़ाव के तरफ बढ़ल जाओ। 
Tags : No Tag
Categories : Uncategorized
Comments : 0 Comment Write Comment